महादेव को प्रसन्न करने के लिए समर्पित श्रावण मास 2026 इस बार अत्यंत विशेष संयोग लेकर आ रहा है। सनातन संस्कृति का यह सबसे पवित्र महीना 22 जुलाई 2026 (बुधवार) से आरंभ होकर 20 अगस्त 2026 (गुरुवार) तक रहेगा। इस दौरान शिवभक्ति, साधना, संयम और पवित्रता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
इस वर्ष सावन की शुरुआत और समाप्ति दोनों ही रविवार को हो रही है, जो इसे और भी दुर्लभ एवं फलदायी बनाता है। वहीं प्रतिपदा तिथि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग इस माह की आध्यात्मिक ऊर्जा को चार चाँद लगाने वाला है।
सावन माह में भगवान शिव की आराधना करने से
मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं
मानसिक शांति मिलती है
रोग, शोक और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है
भक्ति, शक्ति और वैराग्य का भाव जागृत होता है
सनातनी श्रद्धालु इस महीने शिवभक्ति में पूर्ण रूप से लीन हो जाते हैं।
शास्त्रों के अनुसार सावन में कुछ विशेष नियमों का पालन करने से शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं:
पूरे माह पत्ती वाली सब्ज़ियों का त्याग करें
सात्विक भोजन ग्रहण करें
मांसाहार, शराब और नशे से दूर रहें
मसालेदार व तले-भुने भोजन से परहेज करें
स्कंद पुराण के अनुसार दिन में केवल एक बार भोजन करें
स्नान के जल में बिल्वपत्र या आँवला डालकर स्नान करें
तीर्थ या गंगाजल से स्नान विशेष फलदायी माना गया है
संतों और ब्राह्मणों को दूध, दही, अन्न, फल और वस्त्र का दान करें
सावन की शुरुआत: 22 जुलाई 2026
सावन की समाप्ति: 20 अगस्त 2026
इस वर्ष सावन में 4 सोमवार व्रत पड़ेंगे
प्रतिपदा पर श्रवण नक्षत्र का विशेष संयोग
ख्यात ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन माह में किया गया नवग्रह पूजन अत्यंत फलदायी होता है। इस दौरान ग्रह दोष शांति, विशेषकर राहु-केतु और शनि दोष से राहत मिलती है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन में निम्न विधि से पूजन करें:
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
शिवलिंग पर गंगाजल और गाय के दूध से अभिषेक करें
बिल्वपत्र, धतूरा, फल-फूल अर्पित करें
अंत में महाआरती करें और क्षमा प्रार्थना करें
सावन में किए गए अभिषेकों का अलग-अलग फल बताया गया है:
आर्थिक समृद्धि के लिए – दुग्धाभिषेक
शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए – तैलाभिषेक
सर्व मनोकामना पूर्ति के लिए – जलाभिषेक
मृत्यु भय व गंभीर कष्टों से मुक्ति के लिए – महामृत्युंजय मंत्र जाप
काशी को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रधान आदिविशेश्वर की नगरी माना गया है। यहाँ सावन में किया गया रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और दर्शन अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
सावन 2026 शिवभक्तों के लिए साधना, संयम और भक्ति का सर्वोत्तम अवसर है। यदि नियमपूर्वक उपासना की जाए, तो भगवान आशुतोष शीघ्र ही कृपा बरसाते हैं।
మహాదేవుని ప్రసన్నం చేసుకునేందుకు అంకితమైన శ్రావణ మాసం 2026 ఈసారి అత్యంత విశేష యోగాలతో ప్రారంభమవుతోంది. సనాతన సంస్కృతిలో అత్యంత పవిత్రమైన ఈ మాసం 22 జూలై 2026 (బుధవారం) నుండి ప్రారంభమై 20 ఆగస్టు 2026 (గురువారం) వరకు కొనసాగుతుంది. ఈ సమయంలో శివభక్తి, సాధన, నియమం మరియు పవిత్రత ఒక అద్భుత సమ్మేళనంగా దర్శనమిస్తుంది.
ఈ సంవత్సరం శ్రావణ మాసం ప్రారంభం మరియు ముగింపు రెండూ ఆదివారం రావడం విశేషం. అంతేకాక, ప్రతిపద తిథి నాడు శ్రవణ నక్షత్రం సంయోగం ఈ మాసపు ఆధ్యాత్మిక మహిమను మరింత పెంచనుంది.
శ్రావణ మాసంలో శివుని భక్తితో ఆరాధిస్తే
కోరికలు నెరవేరుతాయి
మనస్సుకు శాంతి లభిస్తుంది
గ్రహదోషాలు, బాధలు తొలగిపోతాయి
భక్తి, శక్తి, వైరాగ్య భావన కలుగుతుంది
ఈ నెలలో భక్తులు పూర్తిగా శివభక్తిలో లీనమవుతారు.
శాస్త్రాల ప్రకారం శ్రావణ మాసంలో కొన్ని నియమాలు పాటిస్తే శివుడు త్వరగా ప్రసన్నుడవుతాడు:
ఈ నెలంతా ఆకుకూరలు తినకూడదు
సాత్విక ఆహారం మాత్రమే తీసుకోవాలి
మాంసాహారం, మద్యం మరియు మత్తు పదార్థాలకు దూరంగా ఉండాలి
కారంగా, నూనెలో వేయించిన ఆహారాలను నివారించాలి
స్కంద పురాణం ప్రకారం రోజుకు ఒకసారి మాత్రమే భోజనం చేయాలి
స్నాన జలంలో బిల్వపత్రం లేదా ఉసిరికాయ వేసుకుని స్నానం చేయాలి
గంగాజలం లేదా తీర్థజలంతో స్నానం చేయడం విశేష ఫలదాయకం
సాధువులు, బ్రాహ్మణులకు పాలు, పెరుగు, అన్నం, పండ్లు, వస్త్రాలు దానం చేయాలి
Book Now